पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा राज्य के अधिकारियों को एक रिट जारी की, जिसमें उन्हें गुरुग्राम के DLF सिटी में 4,000 से अधिक अनधिकृत निर्माणों के खिलाफ दो महीने के भीतर शीघ्र कार्रवाई करने के लिए कहा गया। कोर्ट ने स्थानीय प्रशासन की भू-माफियाओं को अनधिकृत इमारतों के निर्माण की अनुमति देने में संलिप्तता पर ध्यान दिया, जो खतरनाक दर से बढ़ रही हैं। जस्टिस सुरेश्वर ठाकुर और जस्टिस विकास सूरी की खंडपीठ ने कहा,
यह पूरी तरह से स्पष्ट है कि कुछ समूहों/भू-माफियाओं की एक शक्तिशाली लॉबी, स्थानीय प्रशासन/आधिकारिक प्रतिवादियों के साथ सक्रिय मिलीभगत करके विकसित कॉलोनी के मूल चरित्र को बर्बाद कर रही है, वह भी केवल इसलिए क्योंकि अधिकारियों ने आंखें मूंद ली हैं और ऐसे अवैध और अनधिकृत निर्माण/अवैध विकास की अनुमति दे रहे हैं; जो उनकी नाक के नीचे खतरनाक दर से हो रहे हैं।” पीठ ने इस बात पर प्रकाश डाला कि अवैध और अनधिकृत निर्माण ज़ोनिंग योजना, बिल्डिंग बायलॉज, 2016, बिल्डिंग बायलॉज, 2017, हरियाणा बिल्डिंग कोड का भी स्पष्ट उल्लंघन है।
मामले में कहा गया कि अगर इस तरह के बेतरतीब और अनियोजित विकास को नहीं रोका गया तो इससे गुरुग्राम के बुनियादी ढांचे का पूरी तरह से पतन हो जाएगा, जिसमें पीने योग्य पानी, सीवरेज, वायु गुणवत्ता, परिवहन, बिजली, अन्य सामान्य बुनियादी ढांचे, सुविधाएं और सुख-सुविधाएं शामिल हैं। अदालत DLF सिटी रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन और DLF-3 वॉयस द्वारा 2021 में दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें अनधिकृत निर्माणों के खिलाफ शिकायतों पर 2018 की कार्रवाई रिपोर्ट को आगे बढ़ाने की मांग की गई।
खंडपीठ ने कहा कि याचिका के साथ प्रस्तुत की गई तस्वीरें स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं कि हरियाणा सरकार द्वारा निर्धारित जनसंख्या/घनत्व मानदंडों का घोर उल्लंघन किया गया और लेआउट योजनाओं/भवन योजनाओं की मंजूरी और अन्य वैधानिक प्रावधानों की शर्तों का भी स्पष्ट रूप से उल्लंघन किया गया। राज्य के वकील ने प्रस्तुत किया कि कम से कम 4,033 सामान्य और EWS श्रेणी के भूखंडों में उल्लंघन पाया गया और कुछ मामलों में कार्रवाई की गई।
रिपोर्ट का अवलोकन करते हुए खंडपीठ ने कहा, “संबंधित अधिकारियों ने उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की, क्योंकि 1975 के अधिनियम की धारा 10(2) के तहत नोटिस जारी किए गए, इसके अलावा कुछ मामलों में 1975 के अधिनियम की धारा 10(2) के तहत बहाली आदेश भी पारित किए गए।” इसके अलावा, खंडपीठ ने पाया कि कई मामलों में सिविल न्यायालयों ने हरियाणा शहरी क्षेत्र विकास एवं विनियमन अधिनियम 1975 के तहत अपने अधिकार क्षेत्र पर प्रतिबंधों के बावजूद स्थगन जारी किया था। परिणामस्वरूप न्यायालय ने निर्देश दिया कि पक्षों की सुनवाई के बाद सिविल मुकदमों को तुरंत बंद कर दिया जाए। उपर्युक्त के आलोक में न्यायालय ने कहा, “संबंधित प्रतिवादियों पर, सारणीबद्ध श्रेणियों (सुप्रा) के संबंध में शीघ्र कार्रवाई करने और दो महीने के भीतर कार्रवाई पूरी करने का आदेश दिया जाता है।” केस टाइटल: DLF सिटी रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन और अन्य बनाम हरियाणा राज्य और अन्य