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लोक सेवक के खिलाफ आवाज उठाना IPC की धारा 353 के तहत अपराध नहीं: कर्नाटक हाईकोर्ट

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कर्नाटक हाईकोर्ट ने होमगार्ड के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामला खारिज कर दिया, जिस पर शिकायतकर्ता पुलिस कांस्टेबल के हाथों से कुछ दस्तावेज मांगने के लिए आवाज उठाने का आरोप लगाया गया था। जस्टिस एम नागप्रसन्ना ने रमेश करोशी द्वारा दायर याचिका स्वीकार की, जिस पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 353, 506 के तहत दंडनीय अपराधों के लिए आरोप लगाया गया था। यह आरोप लगाया गया कि याचिकाकर्ता ने अपनी आवाज उठाई और दूसरे प्रतिवादी शिकायतकर्ता के खिलाफ गाली-गलौज की। पुलिस ने जांच की और याचिकाकर्ता के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया।
याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि आवाज उठाने के अलावा याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई अन्य आरोप नहीं है। उनकी दलील है कि पुलिस ने आवाज उठाने की घटना को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया। रिकॉर्ड देखने के बाद पीठ ने कहा, “IPC की धारा 353 के अनुसार किसी लोक सेवक को आपराधिक बल का उपयोग करके कर्तव्य निभाने से रोका जाना चाहिए। इस मामले में ऐसा कोई आरोप नहीं है कि याचिकाकर्ता ने किसी सरकारी कर्मचारी पर हमला किया या आपराधिक बल का इस्तेमाल किया, जिससे सरकारी कर्मचारी अपने कर्तव्यों का पालन करने में बाधा उत्पन्न हुई। याचिकाकर्ता के खिलाफ एकमात्र आरोप दूसरे प्रतिवादी/शिकायतकर्ता से ऊंची आवाज में बात करना है। इस अदालत के विचार से यह उन तत्वों को पूरा नहीं करता, जो IPC की धारा 353 के तहत किसी अपराध को दंडनीय बनाने के लिए आवश्यक हैं।” इसके अलावा, अदालत ने कहा “IPC की धारा 503 (आपराधिक धमकी) में प्राप्त तत्वों में से कोई भी नहीं पाया गया। इसलिए IPC की धारा 506 के तहत अपराध भी पूरा नहीं होता है। इस प्रकाश में याचिकाकर्ता के खिलाफ आगे की सुनवाई की अनुमति देना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा और न्याय की विफलता होगी।” केस टाइटल: रमेश करोशी और कर्नाटक राज्य

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