फगवाड़ा-जालंधर, 22 मार्च ( प्रीति जग्गी) गवर्नमेंट टीचर्स यूनियन पंजाब के प्रदेश अध्यक्ष सुखविंदर सिंह चहल, महासचिव गुरबिंदर सिंह सस्कौर, वित्त सचिव अमनदीप शर्मा, प्रेस सचिव करनैल फिल्लौर ने पंजाब सरकार से मांग की है कि बजट सत्र में नई शिक्षा नीति 2020 को रद्द करने का प्रस्ताव पारित किया जाए और पंजाब की संस्कृति, भूगोल और विरासत तथा पंजाब के हालातों को ध्यान में रखते हुए नई शिक्षा नीति बनाई जाए। नेताओं ने कहा कि नई शिक्षा नीति के कारण पंजाब में शिक्षा नष्ट हो जाएगी और निजी संस्थानों के हस्तक्षेप के कारण शिक्षा महंगी हो जाएगी और गरीब लोगों से शिक्षा छीन जाएगी। नेताओं ने कहा कि नई शिक्षा नीति देश की विभिन्न संस्कृतियों को नष्ट कर देगी, जिससे पंजाब की अपनी पहचान खतरे में पड़ जाएगी। कई राज्यों ने नई शिक्षा नीति को लागू न करने का निर्णय लिया है, जिससे पंजाब को भी मार्गदर्शन लेना चाहिए। नेताओं ने आगे कहा कि माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 2015 के फैसले के अनुसार सभी कर्मचारियों के बच्चों के लिए सरकारी स्कूलों में शिक्षा के प्रावधान में और संशोधन करके उसे लागू किया जाना चाहिए ताकि पंजाब के खजाने से लाभ उठाने वाले सभी लोगों के बच्चे, चाहे वे कर्मचारी, विधायक, मंत्री या संसद सदस्य हों, सरकारी स्कूलों में पढ़ें। समान स्कूल प्रणाली लागू करने का प्रस्ताव भी पारित किया जाना चाहिए ताकि सभी लोगों के बच्चे सरकारी स्कूलों में शिक्षा प्राप्त कर सकें। तभी लोगों को निजी स्कूलों के शोषण से बचाया जा सकेगा।
इस अवसर पर होशियारपुर से अमनदीप शर्मा व सुनील कुमार, गुरदासपुर से मंगलदीप, नवांशहर से कुलदीप सिंह दुड़का, मोगा से जजपाल सिंह बाजे के व गुरप्रीत सिंह अमीवाल, मुक्तसर से मनोहर लाल शर्मा, संगरूर से सरबजीत सिंह, पटियाला से जगप्रीत सिंह भाटिया, फतेहगढ़ साहिब से राजेश कुमार, फिरोजपुर से बलविंदर सिंह भुट्टो, जसविंदर सिंह, रोपड़ से गुरबिंदर सस्कौर, पठानकोट से सुभाष कुमार, अमृतपाल, मानसा से नरिंदर सिंह माखा, लखविंदर सिंह, मोहाली से गुरप्रीत सिंह, प्रसोतम लाल से मनप्रीत सिंह, श्री अमृतसर से सुच्चा सिंह तरपाई, लुधियाना से जगजीत सिंह मान, बरनाला से हरिंदर मालिया, तरनतारन से सरबजीत सिंह, जालंधर से तीरथ सिंह बस्सी व निर्मोलक सिंह हीरा आदि उपस्थित थे।